गुरु और चेला की एक प्रेणादायक कहानी | Guru Aur Chela Story In Hindi

गुरु और चेला की एक प्रेणादायक कहानी | Guru Aur Chela Story In Hindi

Guru Aur Chela Story In Hindi - यह कहानी एक Guru और उसके प्रिये Chela मगन की कहानी है जो हमें बहुत कुछ सिखाती है। इस Kahani को पढ़ने के बाद पता चलेगा की जीवन में गुरु का महत्व कितना होता है। एक छोटा सा राज्य जयसिंहपुरा हुआ करता था जिसका राजा बहुत ही दयालु था और अपने प्रजा की सुख - दुःख में साथ दिया करता था। इसी राज्य के किनारे पर एक नदी बहती थी वहा पर एक आश्रम बना हुआ था जिसमे गुरु और कई चेले (शिष्य) रहा करते थे। इन सभी शिष्य में मगन बहुत ही मंद बुद्धि का था जिसे सही और गलत का पता लगाना बहुत ही मुश्किल था। मगन की यह कमजोरी गुरु को बहुत सताने लगी और उसने सोचा की मगन को एक बार सम्पूर्ण देश की यात्रा करवाई जाए ताकि दुनिया के बारे में जान सके और सही गलत का निर्णय खुद कर सके। 

Guru Aur Chela Story In Hindi
Guru Aur Chela Story In Hindi
अगली सुबह गुरु अपने सभी चेलो के साथ यात्रा पर निकल पड़ा। गुरु और चेलो ने एक महीने तक चलकर कई देशो की सैर की और अपने शिष्य को अलग अलग भाषा और कल्चर का ज्ञान प्रधान किया। लेकिन इन सब में मगन सबसे अलग था वो अब थक चूका था वह अब आराम करना चाहता है इसलिए गुरु ने अगले राज्य में विश्राम करने की सोची। जैसे ही गुरु और चेला उस राज्य की सीमा में प्रवेश किया तो दिन के समय में सभी लोग सो रहे थे। गुरु और सभी शिष्य इस बात से हैरान थे की ये क्या हो रहा है। पूरा राज्य घूमने पर अब रात होने को आई थी। जैसे ही रात हुई सभी लोग अपने अपने घरो से निकल कर अपने अपने काम पर जाने लगे। 

गुरु और शिष्य को कुछ भी नहीं समझ आ रहा था की यहाँ कैसे लोग है जो दिन में पूरा दिन सोते है और रात को काम करते है। पूर्ण रात होने पर सभी बाजार खुल गए थे तो गुरु ने अपने शिष्य को भोजन की व्यवथा करने को कहा। मगन को बाजार से राशन लाने के लिए गुरु ने पांच आने दिए। अब मगन राशन लेने बाजार गया तो उसे पता चला की सभी चीजों का भाव एक आना ही है इसलिए उसने सभी पक्का हुआ भोजन ले लिया। अब मगन ने पांच आने में बहुत सारा भोजन ले लिया था। जब गुरु ने ये देखा तो दंग रहा गया। गुरु तुरंत समझ गए की यह एक मूर्खो का राज्य है और अगली सुबह यहां से चलने को कहा। 

मगन रात भर और ही कुछ सोच रहा था। उसने अपने गुरु के साथ नहीं जाने का सोचा और यही पर रहने का मन बना लिया। अगली सुबह गुरु चलने को तैयार हुआ लेकिन मगन यहां से जाने को मना कर दिया क्युकी यहाँ पर एक एक आने में सब कुछ मिल रहा है तो घूमने की क्या जरूरत है। 

गुरु ने मगन को बहुत समझाया की यह मूर्खो का राज्य है यहाँ पर आप सुरक्षित नहीं है लेकिन मगन ने नहीं जाने का निर्णय कर लिया था तो गुरु ने कहा की ठीक है यही पर रहो लेकिन जब कभी मुसीबत आये तो मन में मुझे याद कर लेना मदद करने जरूर आउगा। इतना कहकर गुरु अपने बाकी शिष्य के साथ निकल पड़े। 

अब मगन मूर्खो के राज्य में  रह गया और वही पर एक आने में दिन भर भोजन खाता रहता। ऐसे ही एक साल बीत गया। मगन का शरीर बहुत बड़ा हो गया था और उनका बजन भी बहुत ज़्यदा हो गया था। 

एक बार मुर्ख राज्य के किसी सेठ के घर से चोरी हो जाती है। सेठ राजा के दरबार में अपनी शिकायत लेकर जाता है। राजा के शातिर सिपाई उस चोर को पकड़ लेते है। अब उस चोर को राजा द्वारा फांसी की सजा सुनाई जाती है। 

चोर के लिए फांसी के लिए फंदा बनाया गया लेकिन फांसी का फंदा कुछ ज़्यदा छोटा बन गया जिसमे चोर की लम्बाई बहुत पड़ गई। राजा ने देखा यह तो बहुत बड़ी समस्या हो गई फांसी का आदेश जारी हो गया और रुक नहीं सकती। 

राजा ने अपने सैनिक को आदेश दिया और कहा की इस साइज के  आदमी को लेकर आओ फांसी तो आज होकर रहेगी। जैसा की आप को पहले से पता है यह मूर्खो का राज्य है यहाँ पर चोर को फांसी नहीं दी जा रही बल्कि उसे फांसी दी जा रही है जो उस फंदे म फिट रहे। 

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सेनिको को कोई नहीं मिला जो उस फंदे में सही से आये।अंत में सैनिको ने मगन को देखा जो फांसी के लिए बिलकुल सही था। अब मगन को दरबार में लाया गया और फांसी की तैयारी होने लगी। जनता और राजा फांसी देखने के लिये उत्सुक थे। 

मगन को कुछ समझ नहीं आ रहा था आखिर क्या किया जाए। अब मगन को बहुत दुःख हो रहा था। अंत में अपने गुरु को याद किया इतने में गुरु जी  चमत्कारी रूप से आते है। अब  गुरु और चेला अचानक से गायब  जाते है। 

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