Kisan Net (किसान नेट) और गन्ना कैलन्डर

Kisan Net (किसान नेट) और गन्ना कैलन्डर

Kisan Net - उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विभाग ने किसान की समस्या को देखते हुए Kisan Net की शुरुआत की है। या बोल सकते है  की सरकार ने किसान की सहायता के लिए पोर्टल की शुरुआत की है। 

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 Kisan Net क्या है

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यह एक वेबसाइट है। जो उत्तर प्रदेश राज्य के लिये बनाई गई है। यह वेबसाइट गन्ना उत्पादन करने वाले किसान के लिए फायदेमंद है। Kisan Net पर गन्ना सफ्लाई से सम्बंधित सभी जानकारी देख सकते है। Kisan Net के माध्यम से अपने एरिये का कोड डालकर अपनी जानकारी देख सकते है। गन्ने के पुराने बिल, रशीद आदि जानकारी का प्रिंट निकाल सकते है।

Up Kisan Net किसने बनाया

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Kisan.net का निर्माण एमटी सॉफ्टवेयर सिस्टम लिमिडेड नई दिल्ली, द्वारा बनाया गया है इस सुविधा के माध्यम से किसान घर बैठे ही गन्ने से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते है। 

Up गन्ना किसान पर्ची कैसे देखे

उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विभाग ने किसान की समस्या को देखते हुए Kisan Net की शुरुआत की है। या बोल सकते है  की सरकार ने किसान की सहायता के लिए पोर्टल की शुरुआत की है।  यहाँ पर किसान पर्चियों के अलावा पिछले साल की गन्ना सफ्लाई की भी जानकारी देख सकता है। 
Up गन्ना किसान पर्ची देखने के लिए आप सरकार की निम्न पोर्टल पर जा सकते है। 
  • E-Ganna App
  • caneup.in 
  • ganna kisan net portal

Kisan Net किसान के लिए कैसे फायदेमन्द है।

  • इस सुविधा के माध्यम से किसान घर बैठे ही फसल की जानकारी ले सकते है।
  • यह सुविधा मुख्य रूप ले गन्ने की फसल के लिए है तो किसान गन्ने से सम्बंधित जानकारी ऑनलाइन देख सकते है।
  • पिछले साल की रशीद या बिल भी इस पोर्टल पर देख सकते है।
  • किसान कम समय में गन्ने की सफ्लाई कर सकते है।
  • किसान बिचौलियों से बच सकता है। 

Kisan Net Calendar (किसान नेट केलेंडर)

गन्ना विभाग की वेबसाइट के अलावा भी किसान गन्ना कलेंडर पर्ची के आंकडे निम्न वेबसाइट पर भी देख सकते है।
  • www.kisan.net
  • www.upsugarfed.org
  • www.krishakmitra.com
  • #
  • www.bcmlcane.in
  • www.bcmlcane.com
  • www.gannakrishak.in
  • www.kisaansoochna.dwarikesh.com
  • www.krishakmitra.com

गन्ने का इतिहास | History of Sugarcane

गन्ना भारत की मूल फसल है। बहुत सी पौराणिक मान्यताओं में गन्ने का उलेख मिलता है। प्राचीन काल से 19 वीं शताब्दी की शुरुआत में, जब ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों में सफेद चीनी उद्योग सफलतापूर्वक चल रहा था, भारत में नेल का व्यवसाय बढ़ रहा था, जो जर्मनी में रंगाई के नए तरीकों के विकसित होने के रूप में धीमा था।

यह स्थिति भारत में चीनी उद्योग की स्थापना के लिए अनुकूल थी। 1920 में भारत के तत्कालीन गवर्नर-जनरल ने चीनी व्यवसाय के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करते हुए, भारत की चीनी समिति बनाई। 1930 में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गन्ना उपसमिति की सिफारिश पर, एक टैरिफ बोर्ड की स्थापना की गई, जिसने 1931 से 15 वर्षों तक चीनी उद्योग की रक्षा के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव दिया। : भारत में चीनी। उद्योग संरक्षित था।

यद्यपि भारत का पहला प्राचीन गन्ना 1903 में प्रतापुर, देवरिया, उत्तर प्रदेश में स्थापित किया गया था, लेकिन चीनी किसानों को चीनी बेचने और बेचने के किसी भी स्थापित तरीके की कमी के साथ कई कठिनाइयाँ हुई हैं। 1934 में भारत सरकार द्वारा पारित गन्ना अधिनियम, ने राज्य सरकारों को क्षेत्र को नियंत्रित करते समय वैक्यूम चीनी मिलों द्वारा उपयोग की जाने वाली चीनी की न्यूनतम कीमत निर्धारित करने की अनुमति दी।

चीनी विकास विभाग की स्थापना 1935 में उत्तर प्रदेश में की गई थी। सरकार ने चीनी किसानों की सहायता के लिए 1938 चीनी कारखाना नियंत्रण अधिनियम लागू किया। उत्तर प्रदेश चीनी आपूर्ति और विनियमन पर 1953-54 कानून लागू हुआ।

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