बीमारी से बचने का तरीके || Bimari se bachne ka tarika

बीमारी से बचने का तरीके || Bimari se bachne ka tarika

  Bimari se bachne ka tarika -  आज के समय में टीवी केंसर गुर्दे का संक्रमण मधुमेह है जोड़ों का दर्द ह्रदय रोग उच्च रक्तचाप आदि के समय से हमारे शरीर के साथ स्थाई या अस्थाई रूप से जुड़ी रहती है जिस कारण हमारे शरीर को असहनीय दर्द भोगना पड़ता है इन बीमारियों का उचित और कई लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है
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Bimari se bachne ka tarika

आज के समय में टीवी केंसर गुर्दे का संक्रमण मधुमेह है जोड़ों का दर्द ह्रदय रोग उच्च रक्तचाप आदि के समय से हमारे शरीर के साथ स्थाई या अस्थाई रूप से जुड़ी रहती है जिस कारण हमारे शरीर को असहनीय दर्द भोगना पड़ता है इन बीमारियों का उचित और कई लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है आज हम आपको आम होने वाली स्वास्थ्य समस्या तथा उनके निवारण के बारे में बताएगी तो बने रहें आप हमारे न्यूज़ वेबसाइट www.topbharat.in पर

चर्म (त्वचा) रोग Skin disease :-

चर्म रोग सामान्यतः वृद्धावस्था में होता है यह रोक दो प्रकार का होता है
- स्टैसिस डर्मेटाइटिसज
- एक्सफोलिटिव
स्टैसिस डर्मेटाइटिस में त्वचा पर लाल रंग के दाने हो जाते हैं साथ ही प्रभावित क्षेत्र पर सूजन आ जाती है यह शिरा से रक्त का प्रवाह ठीक तरह से न होने के कारण पैर के निचले भाग में पानी की मात्रा एकत्रित हो जाती है जिस कारण से यह रोग होता है

चर्म रोग का उपचार Treatment of skin disease

टांगो को शरीर से ऊपर रखना पेड़ पर इलास्टिक की पट्टी बांधना चिकित्सक परामर्श ले ना

एक्सफोलिएटिव ड्रमटाइटिज:-

 इस प्रकार की त्वचा रोग में त्वचा छिल जाती है और त्वचा सूख कर गिरती रहती है साथ ही त्वचा में ऐठन या खिंचाव उत्पन्न होता है, प्रभावित क्षेत्र पर बाल उड़ जाती है

रोग होने का कारण Causes of skin disease

 दवाइयों के दुष्प्रभाव, श्वेता, असाध्य बीमारियां, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना,

 उपचार

 पूरी तरह से आराम करना, गुनगुने पानी से त्वचा को साफ करना, क्रीम, लोशन लगाना, एंटीहिस्टामाइनस दवाई का प्रयोग करना


 कोई भी त्वचा रोग होने पर त्वचा को रगड़ी नहीं या चीले नहीं क्योंकि ऐसा करने पर उसमें के लिए तो आराम मिल जाता है लेकिन गांव पढ़ने की भी समस्या बनी रहती है

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नेत्र रोग eye disease

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Aak ka ialaj


आंख की रोशनी चले जाना, मोतियाबिंद जैसी आंख के रोग या आंख में धुंधलापन आ जाना, यह रोग मुख्यतः वृद्धावस्था में होता है अपनी नजर को दुरुस्त बनाए रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय

आँखों की बीमारी से बचाव के तरीके Ways to prevent eye disease:-


* नजर को एक जगह टीका कर देखने जैसे कार्य करते पढ़ना आदि कार्य करते समय 30-30 मिनट के अंतराल पर आंख को 5-5 मिनट का आराम दे
* हथेलियों को आँख पर रखे ! आराम से बैठे गहरा सांस लें और अपनी हथेलियों से आंख को ढक ले (योग)
* आंखों को सूर्य की सीधी रोशनी और किसी अन्य खतनाक पदार्थ से दूर रखें

भारत के मुख्य नेत्र अस्पताल :-
आई केयर नेत्र चिकित्सालय,
अरविंद नेत्र चिकित्सालय,
चेतन नेत्र अस्पताल एवं अनुसंधान संस्थान,
गुरु नानक नेत्र केंद्र,
शंकर नेत्रालय,
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,

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गुर्दे का रोग Nephrotic syndrome :-

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Gurde ka ilaj


ऐसे रोग या विकृति जो गुर्दे के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं उसे गुर्दे का रोग कहते हैं, गुर्दे का रोग अनुवांशिक या जन्मजात भी हो सकता है लंबे समय तक गुर्दे खराब होने पर कार्डियोवैस्कुलर रोग होने और मृत्यु होने का बड़ा खतरा बना रहता है, भारत में गुर्दे के रोग समस्याओं के स्तर को ध्यान में रखते हुए पीड़ित व्यक्तियों द्वारा नेशनल किडनी फाउंडेशन नामक एक संगठन स्थापित किया गया है

गुर्दे की बीमारी की रोकथाम Prevention of kidney disease 


* अपने शरीर के वजन का संतुलन बनाए रखें
* शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा सही बनाये रखें
* रक्तचाप को नियंत्रण बनाए रखें

भारत के गुर्दे के उपचार के अस्पताल:- 
इंडिया फाउंडेशन नेशनल किडनी फाउंडेशन अस्पताल

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टीबी रोग TB disease :-

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 टीबी रोग के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार भारत में 5 में से इस रोग से 3 लोग मर रहे हैं इस खतनाक रोग को आधुनिक टीवी विरोधी उपचार जैसे डायरेक्टली ओवरजेड ट्रीटमेंट शॉर्ट टर्म के द्वारा रोका जा सकता है
भारत सरकार ने इस रोग को नियंत्रण करने के लिए राष्ट्रीय क्षयरोग कार्यक्रम चलाया जा रहा है

टी.बी. रोग होने के कारण Tb Due to disease:-

1. इस रोग का प्रमुक कारण अपर्याप्त भोजन,अधिक लोगो का एक साथ रहना,स्वच्छता का अभाव,गाय का कच्चा दुग्ध पीना आदी|
2. टी.बी से ग्रसित व्यक्ति के सम्पर्क मे रहने से या उनकी वस्तु का सेवन करने से
3. धुम्रपान करने से भी यह रोग होने का खतरा बड़ जाता है तो आप लोग इस सब से दुर रहोगे उतना ही अच्छा होगा
4. टी.बी. के रोगी द्वारा छिकने पर निकलने वाले बैक्टीरिया से
अतः इन सब से दूरिया बनाये रखे

रोग फैलने के कारण Tb Cause of disease :-

                             टी. बी. के बैक्टीरिया सांस द्वारा स्वच्छ व्यक्ति के शरीर मे पहुच जाते है तथा फैफड़ो मे अपनी संख्या बढाते रहते है ये बैक्टीरिया अधिक सख्या मे होने पर फैफड़ो मे सक्रमंण फैल जाता है जीस कारण फैफड़ो मे छोटे-छोटे घाव (अल्सर) उत्पन हो जाते है इस रोग कि महत्वपुर्ण बात यह है की ज्यादातर व्यक्तियो मे इस रोग के लक्षण नजर नही आते है और जैसे ही हमारे शरीर मे सफेद रक्त कणिकाऔ कि संख्या कम हो जाती है तो इस रोग के लक्षण नजर आने लगते है यह जीवाणु शरीर मे सोई हुई अवस्था मे लाखो साल हमारे शरीर मे बिना नुकसान पहुचाये रह सकता है लेकिन जैसे ही शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होती है तो यह बैक्टीरिया अपना असर दिखाना शुरू कर देते है इस लिए समय रहते इलाज कर लेना चाहिए

टी.बी. रोग के लक्षण Symptoms of TB disease

1. पेट की T.B. मे, पेट दर्द होना,दस्त लगना, पेट फुलना जैसी समस्या
2. न्यूमोनिया के लक्षण मे, तेज बुखार का आना,खॉसी एवं सिने मे दर्द होना
3. लम्बी सांस लेते समय, छाती मे दर्द होना ,कमर की हड्डी मे सुजन, घुटने मोडने मे परेशानी व जोड़ो मे दर्द का होना
4. गर्दन मे सुजन आना और फोड़ा होना
5. लगातार खॉसी का आना कभी अचानक से तेज खॉसी आने पर खुन का आ जाना
6. हल्का भुखार रहना
7. थकावट रहना, सिने मे दर्द होना, एवं बैचेनी का अनुभव होना
8. भूख न लगना, वजन मे अचानक कमी होना


टीबी रोग का निवारण TB disease prevention


1. बच्चो को T.B. से बचाने के लिये बी.सी.जी. का टीका जन्म के तुरन्त बाद लगाया जाना चाहीये
2. टी. बी. से ग्रसित रोगी को उपचार के दोरान पौष्टिक आहार देना चाहीये तथा घुम्रपान जैसे नशीले पर्दाथ से दुर रखे
3. टी.बी. रोग से बचने के लिये आवशयक शर्त यह है कि दवा डाक्टर की सलाह मे नियमीत रूप से लेनी चाहीये
3. इस बीमारी का इलाज मे एक साल तक लग सकता है, ओर दवाइयो को बिच मे ना छोडे नही तो टी.बी. के  बैक्टीरिया दवा के प्रति लडने की क्षमता विकसित कर लेते है जीस कारण इस पर फिर से काबु पाना मुशकिल हो जाता है
4 पुरानी खांसी से पीड़ित लोगों के संपर्क में आने के बाद हाथ को अच्छी तरह साफ करें
5 फेफड़ों में शेरों के लक्षणों का पता लगाने के लिए छाती का एक्सरा करवाये
6 जब कोई व्यक्ति का खास रहा हो तो उसके नजदीक ना खड़े हो
7  फेफड़े को स्वस्थ रखने के लिए ताजा हवा का सेवन करें
8 विटामिन प्रोटीन खनिज कैल्शियम से भरपूर आहार का सेवन करें

दैनिक जीवन मे वायरल बीमारी के कुछ घरेलू उपचार Some home remedies for viral disease in daily life

 उपाय
- हैजा होने पर नींबू की शिकंजी बनाकर पीना चाहिए
-प्याज में अत्यधिक गुणकारी तत्व होते हैं इसका उपयोग -प्रतिदिन भोजन के साथ करना चाहिए जिससे वायरल बीमारी से बचाव हो सके
-अदरक और काली मिर्च तुलसी के साथ चाय बनाकर इसका सेवन करना चाहिए इसके उपयोग से काशी कफ की समस्या दूर हो जाती है
-भोजन अच्छी तरह से चबाकर खाना चाहिए भोजन के मध्य में पानी का उपयोग ना करें पानी का उपयोग भोजन के 1 घंटे बाद करें क्योंकि इससे भोजन का पाचन अच्छी तरह से हो जाता है .

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