क्या परिणाम होगा ग्लेशियर पिघलने का ? Global warming

क्या परिणाम होगा ग्लेशियर पिघलने का ?

Global Warming - पृथ्वी हमारे सौरमंडल का सबसे सुंदर ग्रह है जिसका 71% भाग पानी है वही 29% भाग जमीन है,जो महासागरों में या ग्लेशियर के रूप में स्थित है, ग्लेशियर दरअसल पृथ्वी पर बनी बर्फ की चट्टानें है जहां पर मीठा पानी एकत्रित है इसी से हमारे लिए पीने का मीठा पानी नदी के रूप में हमारे तक पहुंचता है लेकिन आज यह ग्लेशियर धीरे धीरे पिघल रहे हैं
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Kay parinam hoga galesiyar pigalane ka.?

पृथ्वी पर बढ़ रही नई-नई टेक्नोलॉजी के साथ साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है जिसके कारण पृथ्वी का पर्यावरण तेजी से बदल रहा है और लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण ग्लेशियर  पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है जिस कारण, इस ग्लेशियर में जमी बर्फ धीरे धीरे पिघल रही है, एक अनुमान के अनुसार अगर तापमान इसी तरह बढ़ता गया तो सन 2035-40 तक संपूर्ण हिमालय की बर्फ पिघल जाएगी और इसके साथ साथ अन्य ग्लेशियर भी पिघल जाएगा, पृथ्वी के संपूर्ण धरातल पर पानी ही पानी हो जाएगा

क्या कारण है ग्लेशियर पिघलने का:-

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Kay Karan hai galesiyar pigalane ka ?

आज ग्लोबल वार्मिंग पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या है इसी कारण धरती पर कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ रही है और पृथ्वी के वातावरण में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं

क्या परिणाम होगा ग्लेशियर पिघलने का ?

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Kay parinam hoga galesiyar pigalane ka..?

इसके बारे में सोच कर ही हमारी रूह कांप जाती है
‌1. अगर ग्लेशियर पिघल जाएगा तो महासागर का पानी 200 से 250% तक बढ़ जाएगा
2. जल में इतनी बढ़ोतरी काफी है यही हालत बाकी ऐतिहासिक धरोहरों का होगा, संपूर्ण शहर जल में डूब जाएगा 3. भारत की पूरी धरातल जलमग्न हो जाएगी जिसमें ना दिल्ली बचेगा और ना ही मुंबई
4. लगभग 80 से 90% जनसंख्या नष्ट हो जाएगी नीदरलैंड जैसे शहर तो पूरी तरह नष्ट हो जाएगी और तटीय क्षेत्र के आसपास घनी आबादी वाले क्षेत्र तो संपूर्ण रूप से नष्ट हो जाएगी
5. जो 10% लोग इस विनाशकारी आपदा में बच्चे ,ग उसे जीने के लिए और भी ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि ग्लेशियर पिघलने के कारण पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति पूरी तरह से बदल जाएगी
6. कई जीव तो वातावरण में ढलने से पूर्व ही मर जाएंगे
7. भयानक आपदा से बचे हुए जीव और मनुष्य को हर पल एक नया संघर्ष करना होगा
8. जहां वर्षभर वर्षा होती है वहां पर रेगिस्तान बन जाएगा ओर जहां पर रेगिस्तान था वहां पर वर्ष भर पानी भर जाएगा 9. ग्लेशियर पिघलने के कारण सूर्य की किरणें सीधी धरातल पर पड़ेगी जिससे अधिक मात्रा में जल का वाष्पीकरण होगा 10. परिणाम स्वरूप उत्तराखंड त्रासदी जैसी घटनाएं बार-बार होती रहेगी जिसे बादल फटना कहते हैं

पृथ्वी को बचाने में योगदान:- 

यह किसी एक देश की समस्या नहीं है इसलिए सभी देश को संगठित होकर इस पर संशोधन करना चाहिए ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के कारणों को कम से कम करना चाहिए हमें भी एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारण अपने घर या आसपास या सार्वजनिक स्थलों पर अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए क्योंकि तापमान को पेड़-पौधे ही नियंत्रण करते हैं .

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